राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव-2026 में गूंजा 'वंदे मातरम्', 60 स्थानीय कलाकारों ने मंच पर जीवंत किया भगवान बिरसा मुंडा का संघर्ष

 


हजारीबाग: राष्ट्रगीत "वंदे मातरम्" की सार्थशती एवं महाकवि कालिदास जयंती के पावन अवसर पर हजारीबाग नगर प्रेक्षागृह में संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की स्वायत्त संस्था संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली, जिला प्रशासन हजारीबाग एवं तरंग ग्रुप के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव-2026 का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कला, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम की शुरुआत सभी अतिथियों, कलाकारों और दर्शकों द्वारा सामूहिक रूप से राष्ट्रगीत "वंदे मातरम्" गाकर की गई।

कार्यक्रम में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित अशोक कुमार, डॉ. सरिता सिंह, जिला उप निर्वाचन पदाधिकारी वेदवंती कुमारी, स्वतंत्रता सेनानी विचार मंच के केंद्रीय अध्यक्ष बटेश्वर मेहता, आश्रय फाउंडेशन की सचिव डॉ. अमला राणा, भाजपा जिलाध्यक्ष विवेकानंद सिंह, विधायक प्रतिनिधि सुबोध सिन्हा, आर्ट एंड कल्चरल ट्रस्ट के अध्यक्ष रामकिशोर सावंत, संस्कार भारती के प्रांतीय महामंत्री संजय श्रीवास्तव सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

अतिथियों ने अपने संबोधन में कहा कि "वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का स्वर है। भगवान बिरसा मुंडा के संघर्ष और आदिवासी अस्मिता को रंगमंच के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाना अत्यंत सराहनीय प्रयास है। हजारीबाग के कलाकारों की प्रस्तुति राष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा की पात्र है।"

इस अवसर पर तरंग ग्रुप, हजारीबाग द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति नाटक "धरती आबा, वंदे मातरम् की अमर हुंकार" ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। करीब 60 स्थानीय कलाकारों ने भगवान बिरसा मुंडा के संघर्ष, आदिवासी अस्मिता, स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रभक्ति की भावना को प्रभावशाली अभिनय के माध्यम से मंच पर जीवंत कर दिया। कई भावुक और प्रेरणादायी दृश्यों पर पूरा प्रेक्षागृह तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

नाटक का निर्देशन दीपक कुमार ने किया। सहायक निर्देशक एवं तरंग ग्रुप के सचिव अमित कुमार गुप्ता के साथ अमित कुमार और गुलशन कुमार ने निर्देशन में सहयोग दिया। मंच सज्जा मनोज कुमार ने तैयार की, जबकि नृत्य निर्देशन सुनील कुमार सोनी, बंटी सिंह और ललन कुमार ने किया। हिंदी एवं खोरठा भाषा के प्रभावशाली संवाद, पारंपरिक लोक संगीत, आकर्षक नृत्य, उत्कृष्ट प्रकाश एवं ध्वनि संयोजन ने प्रस्तुति को और भी प्रभावशाली बना दिया।

नाटक में रैम्बो, अनुराधा कुमारी, राखी कुमारी, वर्षा कुमारी, निधि कुमारी, संजना कुमारी, चांदनी कुमारी, अंशिका राय, आराध्या राय, शिवानी पांडेय, अंकिता कुमारी, वैष्णवी, लक्ष्मी कुमारी, संभावी, रीषी कुमार, अगस्त्य कुमार, अमित कुमार, पूजा कृति, संध्या कुमारी, आकांक्षा कुमारी, प्रिया शर्मा, मासूम सिंह, दीपिका मेहता, अंशु कुमारी, तनवीर देव, मेघा राज, जानवी भारती, काजल कुमारी, नंदनी कुमारी, आरोही कश्यप, निशा भारती एवं वंश राज प्रसाद सहित लगभग 60 कलाकारों ने अपनी दमदार प्रस्तुति से दर्शकों का दिल जीत लिया।

आयोजकों के अनुसार इस राष्ट्रीय आयोजन की विशेष उपलब्धि यह रही कि देशभर के 150 से अधिक स्थानों पर एक साथ ऐसे देशभक्ति नाटकों का मंचन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल इतिहास का स्मरण कराना नहीं, बल्कि युवाओं में राष्ट्रप्रेम, सामाजिक एकता, प्रकृति संरक्षण, आदिवासी गौरव और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता विकसित करना भी था।

कार्यक्रम के अंत में अतिथियों ने सभी कलाकारों एवं आयोजन से जुड़े सदस्यों को सम्मानित किया। राष्ट्रगीत "वंदे मातरम्", राष्ट्रगान और "भारत माता की जय" के उद्घोष के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। उपस्थित लोगों ने कलाकारों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों को निरंतर जारी रखने की आवश्यकता पर बल दिया।