हजारीबाग – आदिवासी नेता विक्की कुमार धान ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा आदिवासी समाज को ‘वनवासी’ कहे जाने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह बयान आदिवासी समाज की पहचान, सम्मान और स्वाभिमान पर सीधा आघात है।
गौरतलब है कि दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला मैदान क्षेत्र में आयोजित ‘जनजाति सांस्कृतिक समागम’ के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री ने अपने संबोधन में आदिवासी समाज को ‘वनवासी’ कहकर संबोधित किया था, जिसके बाद देशभर में विरोध के स्वर उठने लगे हैं।
इस बयान की निंदा करते हुए विक्की कुमार धान ने कहा कि देश के 12 करोड़ आदिवासियों को ‘वनवासी’ कहना पूरे समाज की वास्तविक पहचान को कमजोर करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज इस देश की मूल आत्मा है, जिसने सदियों से जल, जंगल और जमीन की रक्षा करते हुए अपनी संस्कृति, परंपरा और अस्तित्व को जीवित रखा है।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज का इतिहास संघर्ष, त्याग और प्रकृति संरक्षण की गौरवशाली परंपराओं से भरा हुआ है। ऐसे समाज को उसकी संवैधानिक और ऐतिहासिक पहचान से अलग किसी अन्य नाम से संबोधित करना उसकी अस्मिता को गहरी ठेस पहुंचाने जैसा है। आदिवासी केवल जंगलों में रहने वाला समाज नहीं, बल्कि देश की सभ्यता, संस्कृति और प्रकृति संतुलन का महत्वपूर्ण आधार हैं।
विक्की कुमार धान ने कहा कि देश के सर्वोच्च और जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को शब्दों का चयन संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ करना चाहिए, ताकि किसी भी समाज की भावनाएं आहत न हों। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज अपने अधिकार, सम्मान और पहचान के प्रति पूरी तरह जागरूक है तथा किसी भी अपमानजनक बयान को कभी स्वीकार नहीं करेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि देश के प्रत्येक नागरिक और जनप्रतिनिधि का यह नैतिक और संवैधानिक दायित्व है कि वह आदिवासी समाज की गरिमा, इतिहास और उनकी वास्तविक पहचान का सम्मान करे।
