हजारीबाग - इंसानियत और सेवा भाव की मिसाल पेश करते हुए हजारीबाग के आरोग्यम अस्पताल ने एक लावारिस नवजात बच्ची को नया जीवन देने का सराहनीय कार्य किया है। जन्मजात कटे होंठ (क्लेफ्ट लिप) से पीड़ित इस मासूम बच्ची को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था, जहां डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की अथक मेहनत, संवेदनशीलता ने उसे जिंदगी की नई उम्मीद दी। बीते 7 मई की शाम लगभग 7:30 बजे सदर थाना पुलिस की गश्ती टीम को एक खाली ई-रिक्शा में नवजात बच्ची लावारिस हालत में मिली। बच्ची के पास एक पर्ची भी बरामद हुई, जिसमें उसे अनाथ आश्रम पहुंचाने की अपील की गई थी। लंबे समय तक खुले वातावरण में रहने के कारण बच्ची संक्रमण की चपेट में आ गई थी और उसे सांस लेने में भी परेशानी हो रही थी। जन्म से ही कटे होंठ की समस्या होने के कारण उसकी स्थिति काफी नाजुक बनी हुई थी। सदर थाना पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए बच्ची को तुरंत हजारीबाग स्थित आरोग्यम अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसे एनआईसीयू में विशेष निगरानी में रखा गया। अस्पताल के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर हीरालाल राम एवं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर प्रकाश चंद्र की देखरेख में बच्ची का इलाज प्रारंभ हुआ। डॉक्टरों ने बच्ची को ऑक्सीजन सपोर्ट, आवश्यक एंटीबायोटिक दवाएं और विशेष नवजात चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई। कटे होंठ की समस्या को ध्यान में रखते हुए उसके लिए विशेष फीडिंग प्रोटोकॉल तैयार किया गया।
अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ ने भी बच्ची की देखभाल पूरी ममता और संवेदनशीलता के साथ की। 24 घंटे निगरानी करते हुए नर्सों ने समय पर दवा देने, दूध पिलाने, साफ-सफाई बनाए रखने और लगातार नजर रखने का कार्य पूरी जिम्मेदारी से निभाया। अस्पताल की नर्सिंग टीम ने सिर्फ अपनी ड्यूटी नहीं निभाई, बल्कि उस मासूम को अपने बच्चे की तरह स्नेह और प्यार दिया। लगातार इलाज और देखभाल के बाद बच्ची की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ। इलाज के दौरान वह हर तीन घंटे में 15 से 20 एमएल दूध लेने और उसे पचाने लगी। चिकित्सकों की सतत निगरानी और उपचार के बाद बच्ची को क्लिनिकली स्टेबल घोषित कर दिया गया। इसके बाद 22 मई को बाल कल्याण समिति हजारीबाग के आदेशानुसार सदर थाना पुलिस ने स्वस्थ बच्ची को सुरक्षित रूप से समिति को सौंप दिया। अस्पताल के निर्देशक हर्ष अजमेरा ने कहा कि चिकित्सा सेवा केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानवता और संवेदनशीलता से भी जुड़ी हुई है। उन्होंने बताया कि बच्ची की स्थिति काफी नाजुक थी, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों और एनआईसीयू टीम की लगातार निगरानी एवं बेहतर उपचार से उसकी हालत में सुधार संभव हो सका। अस्पताल की प्रशासक जया सिंह ने कहा कि आरोग्यम अस्पताल हमेशा मानव सेवा को अपनी प्राथमिकता मानता है। उन्होंने कहा कि जब यह नवजात बच्ची गंभीर हालत में अस्पताल लाई गई, तब डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और स्वास्थ्यकर्मियों ने बिना समय गंवाए उसके इलाज में पूरी ताकत झोंक दी। उन्होंने कहा कि एक मासूम जिंदगी को बचाना अस्पताल परिवार के लिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी थी और पूरी टीम ने संवेदनशीलता एवं समर्पण के साथ अपना कर्तव्य निभाया। इस कार्य पर अस्पताल में मौजूद एक परिजन ने बताया कि आरोग्यम अस्पताल केवल उपचार का केंद्र नहीं, बल्कि मानवता, सेवा और संवेदनशीलता का भी प्रतीक बन गया है यहां डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने सिर्फ एक नवजात शिशु का इलाज नहीं किया, बल्कि एक मासूम जिंदगी को नया जीवन देने का कार्य किया। अस्पताल की नर्सिंग टीम की ममता, समर्पण और सेवा भावना ने यह संदेश दिया कि चिकित्सा सेवा केवल पेशा नहीं, बल्कि इंसानियत का सबसे बड़ा धर्म है।
