राणी सती मंदिर के 28वें स्थापना दिवस समारोह में उमड़ी आस्था, 13 सुहागन महिलाओं की महाआरती ने बांधा समां


हजारीबाग शहर के मालवीय मार्ग स्थित राणी सती मंदिर में आयोजित 28वें स्थापना दिवस समारोह के दूसरे दिन भक्ति, आस्था और भावनाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। प्रातःकाल मंगला आरती के साथ ही मंदिर परिसर पूरी तरह भक्तिमय माहौल में डूब गया। दादी के अलौकिक श्रृंगार, पाटा पूजन और विशेष पूजा-अर्चना के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने दादी के दरबार में माथा टेककर सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना की।

दिनभर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। फूलों से सजे मंदिर, घी के दीपों की जगमगाहट और “जय दादी की” के गूंजते जयकारों ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूरा परिसर दादी की भक्ति में सराबोर हो गया हो।

संध्या बेला में आयोजित 13 सुहागन महिलाओं की भव्य महाआरती समारोह का मुख्य आकर्षण रही। पारंपरिक राजस्थानी वेशभूषा में सजी महिलाओं ने दीपों की थाली के साथ श्रद्धा और समर्पण भाव से दादी की आरती उतारी। इस मनमोहक दृश्य ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। महाआरती में शारदा खण्डेलवाल, मीता बगड़िया, संगीता बीजाका, आशा देवी, आशा जी खण्डेलवाल, कान्ता खण्डेलवाल, शशि सुरेका, अनिता शर्मा, मीनु खण्डेलवाल, डाली बुबना, सुहासिनी देवी, अंजु चौधरी एवं कुसुम देवी शामिल रहीं।

आरती के दौरान श्रद्धालुओं की आंखों में आस्था और चेहरों पर भक्ति का भाव स्पष्ट झलक रहा था। देर शाम तक दादी भक्त भजनों पर झूमते रहे। मंदिर परिसर में गूंज रहे भक्ति गीतों और जयकारों ने माहौल को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया।

मंदिर कमेटी के अध्यक्ष फतेहचंद मुनका ने कहा कि राणी सती दादी की असीम कृपा और भक्तों की श्रद्धा से स्थापना दिवस समारोह हर वर्ष नई ऊंचाइयों को छू रहा है। उन्होंने कहा कि दादी का यह दरबार लोगों को जोड़ने, संस्कारों को सहेजने और समाज में आध्यात्मिक चेतना जगाने का माध्यम बन चुका है।

वहीं मंदिर कमेटी के सचिव रमेश टिबड़ेवाल ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। उन्होंने कहा कि दादी के दरबार में आने वाला हर भक्त अपने साथ आस्था और सकारात्मक ऊर्जा लेकर लौटता है। आयोजन को सफल बनाने में सभी दादी भक्तों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।