हजारीबाग में महिला आरक्षण पर सियासी संग्राम: झामुमो ने भाजपा पर साधा निशाना, “कानून बना फिर भी लागू क्यों नहीं?


हजारीबाग: झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के जिला प्रवक्ता कुणाल यादव ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को आड़े हाथों लिया है। रांची में भाजपा के "महिला आक्रोश मार्च" पर पलटवार करते हुए कुणाल यादव ने इसे महिलाओं और विशेषकर अनुसूचित जाति/जनजाति समाज को गुमराह करने वाली भ्रम फैलाने की राजनीति करार दिया। कुणाल यादव ने कहा कि संसद ने 2023 में ही महिला आरक्षण बिल सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया था, जो महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में 33% आरक्षण का संवैधानिक अधिकार देता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 2023 के कानून में अनुसूचित जाति और जनजाति की महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों के भीतर 33% उप-आरक्षण का स्पष्ट प्रावधान पहले से मौजूद है। कुणाल यादव ने सवाल उठाया कि जब कानून बन चुका है, तो केंद्र सरकार  इसे लागू करने में देरी क्यों कर रही है ?

हाल ही में 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में पेश 131वें संविधान संशोधन विधेयक  का जिक्र करते हुए प्रवक्ता ने कहा कि भाजपा इसे "नया बिल" बताकर प्रचारित कर रही है, जबकि यह केवल मूल कानून में एक अधूरा बदलाव था। इस संशोधन बिल मे  लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव। जनगणना की शर्त को हटाकर सीधे परिसीमन से जोड़ने की कोशिश थी। इस प्रक्रिया में स्पष्टता न होने के कारण यह विधेयक जरूरी दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका। अब "भाजपा अपनी विफलता को विपक्ष के मत्थे मढ़ रही है। जब उसके पास स्पष्ट रोडमैप नहीं था और लोकसभा मे सीटों की संख्या में अचानक भारी वृद्धि का तर्क समझ से परे था, तो इस संशोधन बिल का गिरना तय था।

कुणाल यादव ने कहा कि भाजपा अनुसूचित जाति/ जनजाति महिलाओं के नाम पर भावनात्मक राजनीति कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि परिसीमन की प्रक्रिया पूरी हुए बिना यह तय करना असंभव है कि कौन सी सीटें आरक्षित होंगी। 2026 के संशोधन प्रस्ताव में इस व्यावहारिक ढांचे का अभाव था। 

झामुमो प्रवक्ता ने भाजपा के 'आक्रोश मार्च' को राजनीतिक पाखंड बताते हुए कहा की केंद्र सरकार बताये की देश में जनगणना कब शुरू होगी? परिसीमन की प्रक्रिया कब तक पूरी होगी ?  महिला आरक्षण, विशेषकर अनुसूचित जाति/ जनजाति महिलाओं के लिए, जमीन पर कब लागू होगा?

कुणाल यादव ने अपने बयान के अंत में कहा कि महिला आरक्षण देश की आधी आबादी का संवैधानिक हक है। 2023 में कानून बनने के बावजूद 2026 में संशोधन की विफलता भाजपा की अदूरदर्शिता को दर्शाती है। अब देश को भ्रामक नारों और आक्रोश मार्च की नहीं, बल्कि एक स्पष्ट समयसीमा और कार्यान्वयन की जरूरत है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के जिला प्रवक्ता कुणाल यादव ने महिला आरक्षण संशोधन विधेयक (131वां संशोधन) के गिरने को भाजपा की एक सोची-समझी "पॉलिटिकल फिक्सिंग" करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बिल को पेश करने की टाइमिंग यह साफ करती है कि भाजपा की मंशा महिलाओं को अधिकार देने की नहीं, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों में राजनीतिक लाभ लेने की थी।