केरेडारी प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत कंडाबेर पंचायत के बसरिया, इटिज और सिरमा गांव में संचालित एनटीपीसी की नॉर्थ वेस्ट कोल परियोजना में विस्थापित प्रभावित भू रैयतों ने भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के तहत नौकरी और मुआवजा की मांग को लेकर दूसरे दिन भी परियोजना को पूरी तरह से बंद करा दिया। माइंस बंद रहने से खनन, परिवहन समेत सभी कार्य पूरी तरह ठप रहे।
आंदोलन कर रहे भू रैयतों ने एनटीपीसी नॉर्थ वेस्ट प्रबंधन पर भूमि अधिग्रहण कानून के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि नौकरी और मुआवजा की मांग को लेकर बीते कई महीनों से टाल-मटोल किया जा रहा है। भू रैयतों का कहना है कि जब तक 2013 भूमि अधिग्रहण कानून और लारा एक्ट के तहत जमीन, मकान और पेड़-पौधों का पूरा मुआवजा नहीं दिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
धरना प्रदर्शन की सूचना पर धरना स्थल पर पहुंचे पूर्व मंत्री योगेन्द्र साव ने कहा कि एनटीपीसी प्रबंधन भू रैयतों को ठगने का काम कर रही है। एनटीपीसी की कथनी और करनी में फर्क है, जिससे नाराज होकर भू रैयत आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने मांग की कि एनटीपीसी के पूरे मामले की जांच एसआईटी या किसी रिटायर्ड उच्च पदस्थ व्यक्ति से कराई जाए, ताकि एनटीपीसी प्रबंधन के कारनामों की परत दर परत सच्चाई सामने आ सके।
वहीं पहले दिन के आंदोलन के दौरान केरेडारी अंचल कार्यालय के प्रतिनिधि रामरतन कुमार वर्णवाल, केरेडारी प्रखंड कार्यालय के प्रतिनिधि विवेक कुमार और जिला परिवहन विभाग के प्रतिनिधि से हुई वार्ता के बाद भू रैयतों के जमीन संबंधी कागजात की जांच के लिए कैंप लगाया गया। इस कैंप में एक दर्जन से अधिक भू रैयतों ने अपने जमीन के कागजात जमा किए।
इसके बावजूद भू रैयत 2013 भूमि अधिग्रहण कानून के तहत मुआवजा और अन्य मांगों को लेकर धरना पर डटे हुए हैं। आंदोलन स्थल पर जगदीश साव, अशोक साव, नाजिर मियां, सरिता देवी, ललिता देवी, रामेश्वर साव समेत बड़ी संख्या में विस्थापित प्रभावित भू रैयत मौजूद रहे।
