नवरात्र में नारी सम्मान पर उठे सवाल, बेटियों की सुरक्षा ही सच्ची शक्ति उपासना : रंजन चौधरी

 प्रस्तुति एवं लेखन: रंजन चौधरी

सांसद मीडिया प्रतिनिधि, हजारीबाग संसदीय क्षेत्र।



हजारीबाग।
शारदीय नवरात्र के अवसर पर जहां पूरा समाज मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना कर रहा है, वहीं महिलाओं और मासूम बच्चियों की सुरक्षा का सवाल एक बार फिर चर्चा में है। इसी संदर्भ में हजारीबाग संसदीय क्षेत्र के सांसद मीडिया प्रतिनिधि रंजन चौधरी ने नारी सम्मान, बाल सुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की है।

रंजन चौधरी ने कोडरमा जिले से सामने आए नाबालिग बच्ची के कथित यौन शोषण के मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि मीडिया में आई जानकारी के अनुसार, जिले के सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार पर इलाज के सिलसिले में मदद मांगने आई हजारीबाग की एक नाबालिग बच्ची के कथित यौन शोषण का आरोप लगा है। मामले में उनकी गिरफ्तारी की खबर भी सामने आई है। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगी।

उन्होंने कहा कि जिस समाज में नारी को देवी का स्वरूप मानकर पूजा जाता है, वहां महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है। नवरात्र केवल पूजा-अर्चना और कन्या पूजन का पर्व नहीं है, बल्कि यह अन्याय के खिलाफ खड़े होने और कमजोर लोगों की रक्षा करने की प्रेरणा भी देता है।

रंजन चौधरी के अनुसार, किसी जरूरतमंद परिवार की मजबूरी का कथित तौर पर फायदा उठाने का मामला सामने आना सामाजिक और संस्थागत जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। खासकर नाबालिग बच्चों की सुरक्षा के मामले में संवेदनशीलता, सतर्कता और जिम्मेदारी बेहद जरूरी है।

उन्होंने कहा कि नारी सम्मान केवल भाषणों और नारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसका वास्तविक अर्थ तभी पूरा होगा, जब बेटियों को सुरक्षित वातावरण मिले, उनकी शिकायतों को गंभीरता से सुना जाए और उन्हें बिना किसी भय के न्याय पाने का अवसर मिले।

उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, पीड़िता की पहचान और निजता की पूरी रक्षा की जानी चाहिए तथा उसे आवश्यक कानूनी, मानसिक और सामाजिक सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए। यदि आरोप न्यायिक प्रक्रिया में सिद्ध होते हैं, तो कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

रंजन चौधरी ने समाज से अपील की कि परिवारों में बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाए, सम्मानजनक व्यवहार की शिक्षा दी जाए और सरकारी संस्थानों में जवाबदेही को मजबूत बनाया जाए। केवल घटना के बाद आक्रोश जताना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि मां दुर्गा की आराधना तभी सार्थक होगी, जब हमारी आस्था हमारे आचरण में भी दिखाई देगी और समाज की हर बेटी खुद को सुरक्षित एवं सम्मानित महसूस करेगी।

अंत में रंजन चौधरी ने मां जगदंबा से प्रार्थना करते हुए कहा कि समाज के लोगों को सद्बुद्धि मिले, अन्याय के खिलाफ खड़े होने का साहस मिले और हर बेटी की गरिमा एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने की प्रेरणा मिले।

उन्होंने कहा, “सच्ची शक्ति की उपासना वही है, जिसमें नारी का सम्मान हो। सच्ची भक्ति वही है, जिसमें पीड़ित को न्याय मिले और सच्चा धर्म वही है, जिसमें इंसानियत सबसे ऊपर हो।”