सेवा को जीवन का संकल्प बना चुके युवा रितेश खंडेलवाल, रक्तदान से लेकर जरूरतमंदों की मदद तक सक्रिय


 युवा दिवस की बात हो और हजारीबाग शहर में सेवा कार्यों को अपनी कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने वाले रितेश खंडेलवाल का जिक्र न हो, ऐसा संभव नहीं। युवा शक्ति जब अपनी उम्र, ऊर्जा और उत्साह का उपयोग समाज और जरूरतमंदों के लिए करते हैं तो उन्हें औरों से अलग बनाता है। रितेश खंडेलवाल इसी सोच को अपने कर्मों से चरितार्थ करते नजर आते हैं। 24 जुलाई 1997 को जन्मे रितेश ने स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद से ही समाजसेवा के कार्यों में पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कदम बढ़ाया। बीते करीब 13 वर्षों से जरूरतमंदों की सहायता और सामाजिक कार्यों में निरंतर सक्रिय रहना अपने आप में उनके सेवा-भाव और प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मानव सेवा के प्रति उनका समर्पण रक्तदान जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में भी दिखाई देता है। वे अब तक करीब 17 बार रक्तदान कर चुके हैं। इसके अलावा जरूरत के समय सैकड़ों लोगों तक रक्त उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर उन्होंने कई जिंदगियों को बचाने में सहयोग किया है। रक्त की एक बूंद किसी अनजान व्यक्ति के जीवन की उम्मीद बन सकती है और रितेश ने इस उम्मीद को बार-बार मजबूत किया है। उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि सेवा उनके लिए किसी विशेष अवसर तक सीमित नहीं रही। कोरोना महामारी के उस कठिन दौर में जब लोग अपने घरों से बाहर निकलने तक से डर रहे थे, तब रितेश जरूरतमंदों की मदद के लिए सड़कों पर सक्रिय नजर आए। भय और अनिश्चितता के उस वातावरण में दूसरों की सहायता के लिए आगे बढ़ना उनके भीतर मौजूद मानवीय संवेदना और साहस का परिचायक है। वर्तमान में रितेश खंडेलवाल पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं और हजारीबाग यूथ विंग के सचिव के रूप में भी अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। पत्रकारिता और समाजसेवा दोनों क्षेत्रों में सक्रिय रहकर वे समाज के साथ अपने जुड़ाव को और मजबूत करते हैं। उनके लिए समाजसेवा जीवन का हिस्सा बन गया है । रितेश की एक खास आदत उन्हें औरों से अलग करती हैवे अपनी खुशियों को भी समाज के साथ साझा करना जानते हैं। अपने जन्मदिन को भव्य पार्टी और दिखावे के बजाय बिरहोर बस्ती के बच्चों के बीच मनाना इसी सोच का उदाहरण है। बच्चों के साथ समय बिताना, उनके बीच खुशियां बांटना और उनके चेहरे पर मुस्कान लाने का प्रयास उस युवा सोच को सामने रखता है, जिसकी आज समाज को सबसे अधिक जरूरत है।

रितेश दुबले-पतले शरीर के जरूर हैं, लेकिन उनका व्यक्तित्व उनके शारीरिक आकार से कहीं बड़ा है। कम समय में अपनी मेहनत, लगनशीलता और सेवाभावी कार्यों के बल पर उन्होंने हजारीबाग में अपनी अलग पहचान बनाई है। वे हमेशा कुछ नया करने और समाज के लिए कुछ अलग करने की तलाश में रहते हैं। लोग क्या कह रहे हैं और क्या कर रहे हैं, इसकी परवाह किए बिना अपनी क्षमता और अंतरात्मा की आवाज के अनुसार आगे बढ़ना उनकी कार्यशैली का हिस्सा है। उनके व्यक्तित्व में कुछ बेफिक्रापन जरूर है, जीवन में संतुलन की कुछ कमी भी दिखाई दे सकती है, लेकिन जब बात किसी जरूरतमंद की मदद की आती है तो वे अपनी क्षमता से आगे बढ़कर सहयोग करने से पीछे नहीं हटते। शायद यही कारण है कि उन्होंने कम समय में लोगों के दिलों में वह जगह बनाई है, जिसे केवल प्रचार या पहचान के सहारे हासिल नहीं किया जा सकता। रितेश की सबसे बड़ी पूंजी उनकी मानवीय संवेदना है। वे परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढालना जानते हैं और जरूरत के मुताबिक अपने तौर-तरीकों में बदलाव करने से भी नहीं हिचकते। यही लचीलापन उन्हें सामाजिक कार्यों में सक्रिय बनाए रखता है। आज जब युवा पीढ़ी के सामने सफलता की परिभाषा अक्सर पैसा, पद और प्रतिष्ठा तक सीमित होती जा रही है, तब रितेश खंडेलवाल जैसे युवा यह याद दिलाते हैं कि जीवन की सार्थकता केवल स्वयं के लिए जीने में नहीं, बल्कि दूसरों के काम आने में भी है।

एक युवा का रक्तदान किसी अनजान की जिंदगी बचा सकता है, किसी जरूरतमंद तक समय पर मदद पहुंचाना उसके परिवार की उम्मीद बचा सकता है और किसी बच्चे के साथ कुछ पल बिताना उसके चेहरे पर जिंदगी भर की मुस्कान छोड़ सकता है। रितेश ने इन छोटी-छोटी सेवाओं को अपने जीवन की बड़ी सोच बना लिया है। राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर हजारीबाग को ऐसे युवाओं पर गर्व होना स्वाभाविक है। लेखनी रंजन चौधरी की।