हजारीबाग के युवाओं की अनोखी सेवा: भैरोपुर कांवड़िया शिविर में आस्था के साथ मानवता की मिसाल

 ✍️ रंजन चौधरी,

सांसद मीडिया प्रतिनिधि, हजारीबाग संसदीय क्षेत्र।


सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति में सावन का महीना आस्था, साधना और सेवा का पावन माह माना जाता है। भगवान शिव को समर्पित यह पावन माह देशभर में शिवभक्ति की महिमा, आध्यात्मिक ऊर्जा के संचार और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है। सावन आते ही जहां शिवालयों में हर-हर महादेव का जयघोष गूंजने लगता है और कांवड़ यात्रा श्रद्धा, संकल्प और समर्पण की विराट यात्रा का स्वरूप ले लेती है और कांवड़ यात्रा रूट बोल बम के जयकारे से गुंजायमान होने लगता है।


वहीं झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम इस आस्था का एक सबसे बड़ा और प्रमुख केंद्र है। सावन के दौरान आयोजित श्रावणी मेला विश्व की सबसे बड़ी धार्मिक यात्राओं में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। बिहार के सुल्तानगंज स्थित उत्तरवाहिनी गंगा से पवित्र जल उठाकर लाखों श्रद्धालु पैदल देवघर पहुंचते हैं और बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक कर अपनी मनोकामना एवं श्रद्धा अर्पित करते हैं। सैकड़ों किलोमीटर की इस कठिन यात्रा में कांवड़ियों के लिए सेवा ही सबसे बड़ी साधना बन जाती है।

इसी सेवा परंपरा को आगे बढ़ाने की एक प्रेरक पहल देवघर जाने वाले कांवड़िया मार्ग पर देखने को मिल रही है। उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के मुख्यालय हजारीबाग से निकली सेवाभाव से प्रेरित युवाओं की टोली ने बांका जिले के कटोरिया पंचायत के ग्राम भैरोपुर में कांवड़िया सेवा शिविर स्थापित कर श्रद्धालुओं की सेवा का बीड़ा उठाया है।

हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के सांसद मनीष जायसवाल के सेवाभावी कार्यों और संस्कार से प्रेरणा लेकर गंगा बचाओ-प्रकृति बचाओ न्यास की ओर से बायो इंजेक्ट हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से संचालित यह शिविर आज कांवड़ियों के लिए सेवा और संवेदना का केंद्र बन गया है। यहां श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क चिकित्सा सुविधा, विश्राम और भोजन की उत्तम व्यवस्था की गई है। लंबी और थकाऊ पदयात्रा के बीच यह शिविर कांवड़ियों को राहत के साथ आत्मीयता का एहसास भी करा रहा है।

सेवा के साथ संस्कृति और मनोरंजन का भी सुंदर समन्वय इस शिविर की विशेषता है। कॉकटेल म्यूजिक के प्रसिद्ध गायक ज्ञानदीप द्वारा शिवभक्ति गीतों की प्रस्तुति के माध्यम से शिव भक्तों का मनोरंजन किया जा रहा है। भक्ति संगीत से गूंजता यह शिविर कांवड़ियों की थकान दूर करने के साथ वातावरण को आध्यात्मिक उल्लास से भर देता है।

शिविर के स्वागत द्वार पर सांसद मनीष जायसवाल की तस्वीर के साथ ‘गंगा बचाओ’ का संदेश भी दिखाई देता है। यह सेवा शिविर धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व को जोड़ने का प्रयास भी कर रहा है। बीते गुरु पूर्णिमा से शुरू हुआ यह सेवा अभियान निरंतर जारी है और पूरे सावन तथा भादो माह तक श्रद्धालुओं की सेवा के लिए चलता रहेगा।

इस शिविर को सफल बनाने में बायो इंजेक्ट हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक सुशांत रंजन एवं रेखा देवी, गंगा बचाओ-प्रकृति बचाओ न्यास के अध्यक्ष मिथलेश पाण्डेय, कोषाध्यक्ष प्रवीण पाण्डेय, सचिव भोला महतो, कॉकटेल म्यूजिक के ज्ञानदीप सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि और समाजसेवी इसमें अपनी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। यहाँ कांवड़ियों की निःस्वार्थ सेवा की यह पहल भारतीय संस्कृति के उस मूल भाव को सामने लाती है, जिसमें ‘नर सेवा ही नारायण सेवा’ मानी गई है। हजारीबाग के युवाओं की यह टोली यह संदेश भी देती है कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन छोटे-छोटे सेवाभावी प्रयासों से भी आता है।

श्रावणी मेला के दौरान कांवड़ यात्रा धैर्य, अनुशासन, आस्था, भाईचारे और सेवा की भी यात्रा है। रास्ते में किसी थके हुए कांवड़िये को पानी पिला देना, चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना, भोजन कराना या कुछ पल विश्राम का अवसर देना ये सभी कार्य उसी महान सनातन परंपरा का हिस्सा हैं, जिसने सदियों से भारत की सामाजिक चेतना को जीवित रखा है।

हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के सांसद मनीष जायसवाल से प्रेरित हजारीबाग के युवाओं का भैरोपुर सेवा शिविर इसी परंपरा की आधुनिक अभिव्यक्ति है। यहां आस्था के साथ सेवा है, सेवा के साथ संस्कार है और संस्कार के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी समाहित है। यही सावन की वास्तविक भावना है जहां बाबा भोलेनाथ की भक्ति, गंगा के प्रति श्रद्धा और मानवता की सेवा का संदेश युवा सेवाभावी लोग कांवड़ियों की सेवा के माध्यम से दे रहें हैं। गंगा बचाओ- प्रकृति बचाओ न्यास धार्मिक गतिविधियों के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में हमेशा बढ़चढ़ कर हिस्सा निभाती है और समाज में पीड़ित मानवता के सहयोग के लिए भी हमेशा सक्रिय रहती है। ऐसे सेवा भावी युवाओं की टोली को हमारा सलाम। आपके सेवा भाव का जज्बा और दिलेरी ऐसे ही कायम रहें, ताकि समाज और जरूरतमंदों का भला हो सकें ।