लोकसभा में गूंजा मानव-हाथी संघर्ष का मुद्दा, सांसद मनीष जायसवाल ने बताया राष्ट्रीय संकट


हजारीबाग के सांसद मनीष जायसवाल ने लोकसभा में मानव-हाथी संघर्ष के लगातार बढ़ते मामलों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार का ध्यान इस ओर आकृष्ट किया। उन्होंने अपने वक्तव्य में स्पष्ट कहा कि यह समस्या अब केवल वन्यजीव संरक्षण तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि देश के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले गरीब और आदिवासी परिवारों की जान-माल और आजीविका से सीधे जुड़ा एक बड़ा राष्ट्रीय संकट बन चुकी है। सांसद जायसवाल ने कहा कि देशभर में, विशेषकर झारखंड जैसे राज्यों में, जंगलों के लगातार सिमटने के कारण मानव और हाथियों के बीच टकराव की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने सदन को अवगत कराया कि पिछले कुछ वर्षों में इस संघर्ष में हजारों लोगों की जान जा चुकी है। हालिया स्थिति का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि केवल जनवरी माह में ही झारखंड में 20 से अधिक लोगों की मौत हाथियों के हमलों के कारण हुई है, जो बेहद चिंताजनक है। उन्होंने यह भी कहा कि अब स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि हाथियों का झुंड शहरी क्षेत्रों की ओर भी बढ़ने लगा है। रांची शहर और उसके आसपास, यहां तक कि एयरपोर्ट के निकट भी हाथियों की मौजूदगी दर्ज की गई है। यह इस बात का संकेत है कि उनके प्राकृतिक आवास तेजी से खत्म हो रहे हैं और वे भोजन व पानी की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आने को मजबूर हैं। सांसद ने इस समस्या के मूल कारणों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वन क्षेत्रों में अतिक्रमण, अवैध खनन गतिविधियां और भारी वाहनों के आवागमन से होने वाले विस्फोट हाथियों के प्राकृतिक वातावरण को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहे हैं। इन कारणों से न केवल उनके आवास नष्ट हो रहे हैं, बल्कि उनके व्यवहार और मानसिक स्थिति पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहा है, जिससे वे अधिक आक्रामक हो रहे हैं। सदन में अपनी बात रखते हुए मनीष जायसवाल ने सरकार से कई महत्वपूर्ण मांगें भी कीं। उन्होंने कहा कि हाथियों के लिए निर्धारित प्राकृतिक कॉरिडोर को हर हाल में सुरक्षित किया जाए और उन पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण या अवैध गतिविधि बर्दाश्त न की जाए। साथ ही, संवेदनशील क्षेत्रों में अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित करने की आवश्यकता है, ताकि समय रहते लोगों को सतर्क किया जा सके और जान-माल के नुकसान को रोका जा सके। मुआवजा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान में हाथी हमलों में मृतकों के परिजनों को दी जाने वाली चार लाख रुपये की सहायता राशि बेहद कम है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि किसी 25 वर्ष के युवा की असमय मृत्यु हो जाती है, तो यह राशि उसके परिवार के भविष्य के लिए पर्याप्त नहीं हो सकती। ऐसे में आयु और संभावित आय के आधार पर बीमा जैसी समुचित और न्यायसंगत व्यवस्था लागू की जानी चाहिए, जिससे पीड़ित परिवारों को वास्तविक राहत मिल सके। अंत में सांसद मनीष जायसवाल ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि मानव-हाथी संघर्ष की इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए एक स्थायी, व्यापक और प्रभावी नीति बनाई जाए, जिससे एक ओर जहां वन्यजीवों का संरक्षण सुनिश्चित हो, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण आबादी की सुरक्षा और उनके जीवन-यापन की रक्षा भी हो सके।