संघर्ष से सफलता तक: कंचन देवी ने आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की

 


हजारीबाग जिले के प्रखंड ईचाक स्थित ग्राम दरिया की रहने वाली कंचन देवी ने अपने संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी लिखी है, जो आज पूरे क्षेत्र की महिलाओं के लिए मिसाल बन चुकी है। एक समय साधारण गृहिणी रहीं कंचन देवी का जीवन आर्थिक तंगी और पारिवारिक चुनौतियों से जूझ रहा था, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय अपने हालात को बदलने का संकल्प लिया।

साल 2018 में जब गाँव में सखी मंडल का गठन हुआ, तब कंचन देवी ने झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) से जुड़ने का निर्णय लिया। यही निर्णय उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने नियमित बचत करना शुरू किया और बैठकों में सक्रिय भागीदारी निभाई। उनकी लगन और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें सखी मंडल, ग्राम संगठन (VO) और संकुल संगठन (CLF) में अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी सौंपी गई।

💼 बिजनेस की शुरुआत

आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए कंचन देवी ने CIF से ₹2,00,000 का ऋण प्राप्त किया और प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) योजना के तहत बैंक से लोन लेकर गाँव में कॉपी प्रिंटिंग एवं स्टेशनरी व्यवसाय की शुरुआत की।

📈 सफलता की कहानी

अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने SHG, VO और CLF नेटवर्क का प्रभावी उपयोग किया। धीरे-धीरे उनका काम बढ़ने लगा और आज कंचन देवी हर महीने ₹15,000 से ₹20,000 तक की आय अर्जित कर रही हैं। यह व्यवसाय न सिर्फ उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना रहा है, बल्कि उन्हें समाज में एक नई पहचान और सम्मान भी दिला रहा है।

🗨️ कंचन देवी की जुबानी

“अगर महिलाओं को सही मार्गदर्शन और अवसर मिले, तो वे किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकती हैं। आज मैं आत्मनिर्भर हूँ और इसका श्रेय JSLPS को जाता है।”

🚀 भविष्य की योजना

कंचन देवी अब अपने व्यवसाय को और विस्तार देने की दिशा में काम कर रही हैं। उनकी योजना कॉपी प्रिंटिंग व्यवसाय को बड़े स्तर पर ले जाने, रामगढ़, चतरा और कोडरमा जैसे जिलों में सप्लाई शुरू करने तथा कॉपी कवर प्रिंटिंग मशीन खरीदने की है।

📌 संक्षिप्त प्रोफाइल

नाम: कंचन देवी
पति: सुनील कुमार मेहता
पता: ग्राम दरिया, प्रखंड ईचाक, जिला हजारीबाग
सखी मंडल: राधा सखी मंडल
मोबाइल: 9693587835

👉 कंचन देवी की यह प्रेरणादायक यात्रा यह साबित करती है कि यदि हौसले बुलंद हों और सही मार्गदर्शन मिले, तो ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भर बनकर समाज में बदलाव की मजबूत नींव रख सकती हैं।