हजारीबाग: आर्ष कन्या गुरुकुल में 15वें वार्षिक महोत्सव पर विश्वकल्याण महायज्ञ, भक्ति और आस्था से गूंजा परिसर


हजारीबाग - शहर के नवाबगंज स्थित आर्ष कन्या गुरुकुल का प्रांगण गुरुवार को भक्ति, आस्था और सनातन परंपरा के अद्भुत संगम का साक्षी बना। 15वें वार्षिक महोत्सव के अवसर पर आयोजित विश्वकल्याण महायज्ञ में जिले के विभिन्न प्रखंडों सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु, अभिभावक एवं धर्मप्रेमी नागरिक शामिल हुए। पूरे दिन चले इस धार्मिक अनुष्ठान में वैदिक विधि-विधान के साथ आचार्यों द्वारा यज्ञ संपन्न कराया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने आहुति देकर राष्ट्र की उन्नति, सुख-समृद्धि, पर्यावरण शुद्धि और विश्व शांति की कामना की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में युवा समाजसेवी हर्ष अजमेरा एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रसिद्ध न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. राहुल कुमार की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। गुरुकुल के आचार्यों द्वारा दोनों अतिथियों को अंगवस्त्र एवं पुष्पगुच्छ प्रदान कर सम्मानित किया गया। महोत्सव का मुख्य आकर्षण गुरुकुल के नन्हे ब्रह्मचारी एवं कन्याएं रहीं, जिन्होंने भगवा वेशभूषा में सुसज्जित होकर सस्वर वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया। उनकी मधुर वाणी से गूंजते मंत्रों और हवन कुंड से उठती सुगंधित आहुति ने पूरे वातावरण को भक्तिमय एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत कर दिया। कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित श्रद्धालु भक्ति भाव में लीन नजर आए। इस दौरान गुरुकुल के विद्यार्थियों द्वारा वैदिक संस्कृति पर आधारित लघु प्रस्तुतियां भी दी गईं, जिसने उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अपने संबोधन में मुख्य अतिथि हर्ष अजमेरा ने कहा कि गुरुकुल शिक्षा पद्धति भारतीय संस्कृति की आत्मा है, जहां केवल पुस्तक ज्ञान ही नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों, अनुशासन, संस्कार और राष्ट्रभक्ति का समग्र विकास होता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में गुरुकुल जैसे संस्थानों की आवश्यकता और भी बढ़ गई है, जो नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने इस प्रकार के आयोजनों को समाज के लिए अत्यंत प्रेरणादायक बताते हुए गुरुकुल परिवार के प्रयासों की सराहना की और विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। वहीं विशिष्ट अतिथि डॉ. राहुल कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि बच्चों के मानसिक, नैतिक एवं आध्यात्मिक विकास के लिए इस प्रकार के आयोजन अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि गुरुकुल में दी जा रही शिक्षा बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में प्रेरित करती है। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने सनातन धर्म की एकता, अखंडता एवं सांस्कृतिक विरासत को बनाए रखने का संकल्प लिया। आयोजन स्थल पर सुव्यवस्थित व्यवस्था, अनुशासन और सेवा भाव देखने को मिला। कार्यक्रम की सफलता में गुरुकुल के आचार्यों, शिक्षकों, प्रबंधन समिति एवं स्थानीय नागरिकों की सक्रिय भूमिका रही। अंत में प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि समाज में सांस्कृतिक जागरूकता, एकता और नैतिक मूल्यों के प्रसार का भी सशक्त माध्यम सिद्ध हुआ।