हजारीबाग। मांदर की गूंज, नगाड़ों की थाप, करमा गीतों की स्वर-लहरियां और पारंपरिक नृत्य की कदमताल ने बुधवार को हजारीबाग के संत कोलंबस कॉलेज स्टेडियम को झारखंडी लोक-संस्कृति के रंग में रंग दिया। यहां सर्व आदिवासी समाज, हजारीबाग के तत्वावधान में करम पूर्व संध्या एवं आदिवासी सांस्कृतिक और रंगारंग महोत्सव का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन हजारीबाग के एडिशनल कमिश्नर महेंद्र छोटन उरांव और कल्याण पदाधिकारी परविन बाखला ने फीता काटकर किया। उद्घाटन के बाद कार्यक्रम स्थल मांदर और नगाड़ों की थाप के साथ तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। अतिथियों का पारंपरिक तरीके से स्वागत एवं सम्मान किया गया।
समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में नीरज भोक्ता, शाशी पन्ना और ज्योत्सना केरकेट्टा मौजूद रहे। वहीं झारखंडी कलाकार मैक्स भाई, नितेश कच्छप समेत अन्य कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। लोकगीतों और पारंपरिक संगीत पर युवाओं और दर्शकों में खासा उत्साह देखने को मिला। सामूहिक नृत्य और गीत-संगीत ने देर शाम तक लोगों को बांधे रखा।
करम पूर्व संध्या को लेकर संत कोलंबस कॉलेज स्टेडियम को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। बड़ी संख्या में महिला-पुरुष, युवा और बच्चे पारंपरिक वेशभूषा में कार्यक्रम में शामिल हुए। आयोजन स्थल पर झारखंड की लोक-संस्कृति, परंपरा और आदिवासी जीवनशैली की झलक देखने को मिली।
कार्यक्रम की अगुवाई सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष विक्की कुमार धान और संरक्षक विजय सिंह भोक्ता ने की। हजारीबाग के विभिन्न प्रखंडों के साथ झारखंड के अलग-अलग क्षेत्रों से सामाजिक प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, युवा और सांस्कृतिक प्रेमी भी समारोह में पहुंचे।
इस मौके पर सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष विक्की कुमार धान ने कहा कि करमा पर्व आदिवासी समाज के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखने वाला पर्व है। उन्होंने इसे प्रकृति के साथ समाज के संबंध, सामाजिक एकता, भाईचारे और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा पर्व बताया। उन्होंने कहा कि करम पूर्व संध्या के आयोजन का उद्देश्य समाज की संस्कृति और परंपरा को व्यापक मंच देना है।
वहीं संरक्षक विजय सिंह भोक्ता ने कहा कि करमा पर्व समाज की पहचान और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। उन्होंने कहा कि आधुनिक दौर में परंपराओं को जीवित रखना और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना जरूरी है।
देर शाम तक चले कार्यक्रम में पारंपरिक गीत-संगीत, नृत्य और कलाकारों की प्रस्तुतियों ने माहौल को उत्सवमय बनाए रखा। आयोजन के माध्यम से हजारीबाग में आदिवासी संस्कृति, परंपरा, प्रकृति प्रेम और सामूहिक एकता की झलक देखने को मिली।
शीर्षक: हजारीबाग में करम पूर्व संध्या पर झारखंडी संस्कृति की दिखी भव्य झलक