रंजन चौधरी
सांसद मीडिया प्रतिनिधि, हजारीबाग लोकसभा क्षेत्रहजारीबाग। जीवन में खुशी केवल परिस्थितियों के अनुकूल होने से नहीं, बल्कि व्यक्ति के दृष्टिकोण से तय होती है। इंसान अक्सर अपनी खुशियों को उन चीजों से जोड़ देता है, जो अभी उसके पास नहीं हैं। उसे लगता है कि कोई इच्छा पूरी हो जाए, कोई मंजिल हासिल हो जाए या परिस्थितियां उसके मनमुताबिक हो जाएं, तभी जीवन सुखी होगा। जबकि वास्तविकता यह है कि संतोष और सकारात्मक सोच के साथ वर्तमान को स्वीकार करना ही जीवन की सच्ची खुशी है।
सांसद मीडिया प्रतिनिधि, हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र रंजन चौधरी ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि जीवन में कुछ अधूरे सपने, इच्छाएं, इंतजार और चुनौतियां भी जरूरी हैं। यदि हर चीज मनमुताबिक मिल जाए तो चाहत और जीवन के सफर का अर्थ ही समाप्त हो जाएगा। इसलिए आने वाले कल की खुशियों का इंतजार करने के बजाय वर्तमान में उपलब्ध सुख को महसूस करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति को जहां रहे, वहां पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभानी चाहिए। कर्मों में नेकी, व्यवहार में विनम्रता और रिश्तों में सम्मान का भाव बनाए रखना जरूरी है। बुजुर्गों का सम्मान, हमउम्रों के साथ सद्भाव और छोटों के प्रति स्नेह ही व्यक्ति के वास्तविक चरित्र की पहचान है। इंसान की पहचान उसके पद, प्रतिष्ठा या संपत्ति से नहीं, बल्कि उसके कर्म और व्यवहार से होती है।
रंजन चौधरी ने कहा कि जीवन में जो भी जिम्मेदारी मिले, उसे बोझ नहीं बल्कि अवसर समझकर पूरे मन से निभाना चाहिए। आधे मन से किया गया कार्य सफलता तो दे सकता है, लेकिन आत्मसंतोष नहीं दे सकता। ईश्वर पर आस्था, प्रकृति के प्रति प्रेम और नियति पर विश्वास व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की शक्ति देता है।
उन्होंने कहा कि हर प्रश्न का उत्तर तुरंत मिलना और हर रास्ते का आसान होना जरूरी नहीं है। कई बार देर से मिलने वाला उत्तर ही जीवन का सबसे बड़ा सबक बन जाता है। इसी तरह तन की स्वच्छता के साथ मन को नकारात्मकता, ईर्ष्या और द्वेष से मुक्त रखना भी आवश्यक है। सकारात्मक मन वाला व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में भी रास्ता खोज लेता है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि जीवन में जो मिला, उसके लिए आभार रखें और जो नहीं मिला, उसके लिए शिकायतों का बोझ न ढोएं। संतोष का अर्थ प्रयास छोड़ देना नहीं, बल्कि आगे बढ़ते हुए वर्तमान की खुशियों को महसूस करना है।
उन्होंने कहा कि जीवन में हर दिन उत्सव नहीं होता। कभी धूप तो कभी छांव, कभी प्रशंसा तो कभी आलोचना और कभी अपनों का साथ तो कभी दूरी का एहसास होता है। इन परिस्थितियों के बीच यदि विश्वास, संयम और सकारात्मकता कायम रहे तो यही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है।
रंजन चौधरी के अनुसार, असली खुशी तब नहीं है जब जीवन में कोई कमी न हो, बल्कि तब है जब कमियों के बावजूद मन में संतोष, संघर्षों के बावजूद उम्मीद और परिस्थितियों के बावजूद चेहरे पर मुस्कान बनी रहे। जीवन का सौंदर्य सब कुछ पा लेने में नहीं, बल्कि जो मिला उसे प्रेम से जीने, जो नहीं मिला उसे सहजता से स्वीकार करने और आने वाले कल पर विश्वास रखने में है।
उन्होंने कहा कि कर्म करते रहना, रिश्ते निभाते रहना, मुस्कुराते रहना और हर परिस्थिति में भीतर की सकारात्मकता को बनाए रखना ही सफल जीवन का सार है। हर इच्छा का पूरा होना जरूरी नहीं, बल्कि मन का शांत होना जरूरी है। हर मंजिल मिलना जरूरी नहीं, बल्कि जीवन का सफर सार्थक होना जरूरी है।
