76 साल के हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, 25 साल की संवैधानिक नेतृत्व यात्रा पर उपलब्धियों और चुनौतियों की चर्चा

 प्रस्तुति: ✍️ रंजन चौधरी, सांसद मीडिया प्रतिनिधि, हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र


नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 सितंबर 2026 को 76 वर्ष के हो गए। गुजरात के वडनगर से शुरू हुआ उनका राजनीतिक सफर अब देश के प्रधानमंत्री के रूप में तीसरे कार्यकाल तक पहुंच चुका है। 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद नरेंद्र मोदी ने 25 साल की संवैधानिक नेतृत्व यात्रा पूरी करने की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव पार किया है। प्रधानमंत्री कार्यालय और PIB के अनुसार, अक्टूबर 2025 में उन्होंने सरकार के प्रमुख के रूप में अपने 25वें वर्ष में प्रवेश करने की जानकारी साझा की थी।

नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन को केवल चुनावी उपलब्धियों के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी शासन शैली और विभिन्न योजनाओं को बड़े जन-अभियानों में बदलने के प्रयास के रूप में भी देखा जाता है। जनधन, स्वच्छ भारत, डिजिटल भुगतान, स्टार्टअप इंडिया, आत्मनिर्भर भारत और अन्य योजनाओं के जरिए सरकार ने वित्तीय समावेशन, तकनीक और जनभागीदारी पर जोर दिया है।

जनधन से डिजिटल भुगतान तक बड़ा बदलाव

प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत 2 सितंबर 2026 तक देश में 59.21 करोड़ लाभार्थी खाते दर्ज किए गए हैं। इन खातों में करीब 3.17 लाख करोड़ रुपये जमा हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार करीब 32.98 करोड़ महिला लाभार्थी भी इस योजना से जुड़ी हैं।

डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में भी भारत ने तेज विस्तार दर्ज किया है। NPCI के आंकड़ों के अनुसार अगस्त 2026 में UPI के जरिए 24,508.96 मिलियन यानी करीब 2,450.9 करोड़ लेन-देन हुए। इन लेन-देन का कुल मूल्य करीब 29.82 लाख करोड़ रुपये रहा।

इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि डिजिटल भुगतान अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि आम उपभोक्ताओं और छोटे कारोबारियों के आर्थिक व्यवहार का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

बुनियादी ढांचे और स्टार्टअप पर जोर

मोदी सरकार के कार्यकाल में सड़क, रेलवे, हवाई संपर्क, डिजिटल कनेक्टिविटी और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर भी लगातार जोर दिया गया है। सरकार की ओर से विभिन्न मौकों पर एक्सप्रेसवे, वंदे भारत ट्रेन, हवाई अड्डों और सड़क नेटवर्क के विस्तार के आंकड़े सामने रखे गए हैं।

इसी के साथ स्टार्टअप इंडिया के जरिए युवाओं में उद्यमिता को बढ़ावा देने की कोशिश की गई। सरकार के आंकड़ों में DPIIT से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप की संख्या 2 लाख से अधिक होने की जानकारी दी गई है। महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए भी अलग-अलग योजनाओं और प्रोत्साहनों पर जोर दिया गया है।

गरीब कल्याण और विकास की दोहरी चुनौती

मोदी सरकार के शासन मॉडल में गरीब कल्याण और बुनियादी विकास दोनों को प्रमुखता दी गई है। जनधन, उज्ज्वला, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास, मुद्रा और पीएम स्वनिधि जैसी योजनाओं के जरिए सरकार ने अलग-अलग वर्गों तक वित्तीय सहायता, आवास, स्वास्थ्य और स्वरोजगार से जुड़ी सुविधाएं पहुंचाने का दावा किया है।

हालांकि किसी भी सरकारी योजना का अंतिम मूल्यांकन केवल लाभार्थियों की संख्या से नहीं, बल्कि उसके वास्तविक प्रभाव से किया जाता है। आने वाले वर्षों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन योजनाओं से रोजगार, आय, स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन की गुणवत्ता में कितना स्थायी सुधार हुआ।

वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में भारत की विदेश नीति और वैश्विक मंचों पर सक्रियता भी चर्चा का प्रमुख विषय रही है। डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, अंतरिक्ष, स्टार्टअप, विनिर्माण, ऊर्जा और ग्लोबल साउथ जैसे मुद्दों पर भारत की भूमिका बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

हालांकि भारत की वैश्विक स्थिति का आकलन केवल अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी सक्रियता से नहीं किया जा सकता। घरेलू अर्थव्यवस्था, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि उत्पादकता और सामाजिक समरसता भी देश की दीर्घकालिक ताकत के महत्वपूर्ण आधार हैं।

आगे की राह में कई बड़ी चुनौतियां

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन पर उपलब्धियों के साथ उन चुनौतियों पर चर्चा भी जरूरी है, जिनका सामना भारत को आने वाले वर्षों में करना है।

युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण रोजगार, उच्च शिक्षा और कौशल विकास, किसानों की उत्पादकता और आय, छोटे शहरों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता, न्याय तक आसान पहुंच और पर्यावरणीय संतुलन जैसे मुद्दे आने वाले दशक में महत्वपूर्ण रहेंगे।

25 वर्षों की नेतृत्व यात्रा के बाद अब चुनौती केवल योजनाएं बनाने की नहीं, बल्कि उनके प्रभाव को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की भी है।

‘विकसित भारत’ के लक्ष्य पर निगाह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई मौकों पर 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की बात कही है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार के साथ समाज और नागरिकों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण होगी।

प्रधानमंत्री के 76वें जन्मदिन के मौके पर उनके समर्थकों और शुभचिंतकों की ओर से दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना की जा रही है। वहीं, देश के सामने अगले वर्षों की विकास यात्रा को अधिक समावेशी बनाने की अपेक्षा भी बनी हुई है।

नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन की स्थायी विरासत का आकलन अंततः इस बात से होगा कि आने वाले वर्षों में भारत के सामान्य नागरिक के जीवन में कितने ठोस और टिकाऊ बदलाव दिखाई देते हैं।

प्रस्तुति: रंजन चौधरी, सांसद मीडिया प्रतिनिधि, हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र