हजारीबाग। हो एंटरटेनमेंट कल्चरल टीम एवं जन जागरण केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राखी मेकिंग वर्कशॉप में तैयार की गई हस्तनिर्मित राखियां बुधवार को वृद्धाश्रम पहुंचीं। संस्था के सदस्यों ने वृद्धाश्रम जाकर बुजुर्गों की कलाई पर राखी बांधी और उनके साथ रक्षाबंधन का पर्व मनाया। इस दौरान बुजुर्गों का आशीर्वाद भी लिया गया।
इससे पूर्व आयोजित राखी मेकिंग वर्कशॉप में करीब 25 से 30 प्रतिभागियों ने अपने हाथों से राखियां तैयार की थीं। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल राखियां बनाना नहीं, बल्कि परिवार से दूर रह रहे बुजुर्गों तक प्रेम, अपनापन और सम्मान पहुंचाना था।
जन जागरण केंद्र के सचिव संजय कुमार सिंह ने कहा कि हो एंटरटेनमेंट कल्चरल टीम के साथ जन जागरण केंद्र लगातार सामाजिक एवं रचनात्मक गतिविधियों में सहयोग करता रहा है। राखियों को वृद्धाश्रम तक पहुंचाकर बुजुर्गों के साथ रक्षाबंधन मनाना इस पहल को और सार्थक बनाता है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी ऐसे सामाजिक कार्यों में सहयोग जारी रहेगा।
संस्था के अध्यक्ष शशि भूषण ने कहा कि कार्यशाला में तैयार राखियों को केवल कला नहीं, बल्कि भावनाओं की डोर के रूप में देखा गया। जब इन्हीं राखियों से बुजुर्गों की कलाई सजी तो मेहनत सार्थक महसूस हुई। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों की मुस्कान और आशीर्वाद ही इस पहल की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
संस्था के सचिव रोहित वर्मा ने कहा कि टीम कला, संस्कृति, खेलकूद और आर्ट एंड क्राफ्ट के माध्यम से लोगों को जोड़ने का प्रयास करती है। राखी मेकिंग वर्कशॉप का उद्देश्य कार्यक्रम तक सीमित न रहकर तैयार राखियों को जरूरतमंद और अपनों से दूर लोगों तक पहुंचाना था। जन जागरण केंद्र के सहयोग से यह प्रयास सफल हुआ।
महिला सदस्य सनाया ने कहा कि वृद्धाश्रम में बुजुर्गों की कलाई पर राखी बांधना भावुक अनुभव रहा। उनकी खुशी देखकर महसूस हुआ कि किसी को अपनापन देने के लिए बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि छोटी-सी संवेदनशील पहल की जरूरत होती है।
इस अवसर पर संस्था के संस्थापक चंदन सिंह, अध्यक्ष शशि भूषण, सचिव रोहित वर्मा, सदस्य पवन रजक, सौरभ, पूजा कृति, अंशिका, आराध्या एवं महिला सदस्य सनाया सहित टीम के अन्य सदस्य मौजूद रहे। सभी ने बुजुर्गों को राखी बांधी और उनका आशीर्वाद लिया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में जन जागरण केंद्र का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। संस्था के पदाधिकारियों ने कहा कि कला, संस्कृति और सामाजिक सरोकार को जोड़कर भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
