शुक्रवार को कृष्ण वल्लभ महिला महाविद्यालय परिसर में स्थित आदिवासी बालिका छात्रावास में लंबे समय से बनी पेयजल समस्या को लेकर राष्ट्रीय आदिवासी छात्र संघ के केंद्रीय संयोजक सह पूर्व प्रत्याशी मुन्ना सिंह के निजी मीडिया प्रतिनिधि विक्की कुमार धान ने प्रभारी जिला कल्याण पदाधिकारी महेंद्र छोटन उरांव को ज्ञापन सौंपकर छात्रावास में रह रही 200 से अधिक आदिवासी छात्राओं के लिए स्वच्छ एवं नियमित पेयजल की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग किया। ज्ञापन में कहा गया है कि छात्रावास में पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण छात्राओं को प्रतिदिन कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। पानी के लिए लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ती है और कई बार छात्राओं को अपनी पढ़ाई छोड़कर बाहर से पानी लाना पड़ता है। इससे उनकी शिक्षा प्रभावित होने के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ रहे हैं। विक्की कुमार धान ने बताया कि छात्रावास परिसर स्थित चापाकल से कई बार लाल रंग का दूषित पानी निकलने की शिकायत मिली है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने प्रशासन से छात्राओं के हित में तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग करते हुए कहा कि आदिवासी छात्राओं को बेहतर शैक्षणिक एवं आवासीय वातावरण उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है, इसलिए पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा की अनदेखी उचित नहीं है। ज्ञापन के माध्यम से जलापूर्ति व्यवस्था की तकनीकी जांच, शुद्ध पेयजल की नियमित उपलब्धता, आवश्यकता पड़ने पर नए बोरवेल, जलमीनार अथवा पाइपलाइन निर्माण, पेयजल की गुणवत्ता की नियमित जांच तथा समयबद्ध कार्ययोजना के तहत स्थायी समाधान सुनिश्चित करने की मांग की है। साथ ही इस मामले में लापरवाही बरतने वाले संबंधित अधिकारियों एवं एजेंसियों के विरुद्ध कार्रवाई की भी मांग की गई है।मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रभारी जिला कल्याण पदाधिकारी महेंद्र छोटन उरांव ने ज्ञापन प्राप्त होते ही आदिवासी बालिका छात्रावास का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने छात्राओं से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा पेयजल, विद्युत आपूर्ति, बाउंड्री वॉल सहित अन्य आधारभूत सुविधाओं का जायजा लिया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि समस्या की विस्तृत जांच कर आवश्यक कदम शीघ्र उठाए जाएंगे, ताकि छात्राओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। गौरतलब है कि छात्रावास में पेयजल संकट लंबे समय से बना हुआ है। छात्राओं का कहना है कि समस्या के स्थायी समाधान में लगातार हो रही देरी का असर उनकी पढ़ाई और दैनिक जीवन पर पड़ रहा है। ऐसे में अब जिला प्रशासन की पहल के बाद छात्राओं को शीघ्र राहत मिलने की उम्मीद जगी है।
