✍ रंजन चौधरी, सांसद मीडिया प्रतिनिधि,
हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र ।
जब कोई व्यक्ति 45 साल पीछे मुड़कर देखता है, तो अक्सर यादें धुंधली हो जाती हैं। लेकिन हजारीबाग के लिए गर्व का पर्याय बन चुके एक 'ब्लड मैन' की स्मृतियाँ आज भी उतनी ही जीवंत हैं, जैसे यह कल की ही बात हो। हजारीबाग के इस 'ब्लड मैन' का नाम है निर्मल जैन। 18 मार्च 2026 यानी बुधवार को दोपहर 1:00 बजे जब उन्होंने अपने जीवन का 100वां स्वैच्छिक रक्तदान पूरा किया, तो यह महज़ एक संख्या का रिकॉर्ड नहीं बना बल्कि उनके सेवा, समर्पण और उस दृढ़ संकल्प की 'सेंचुरी' थी, जिसने झारखंड ही नहीं, देश भर में लाखों लोगों को जीवनदान दिया है।
रक्तदान की ऐतिहासिक सेंचुरी पूरा करने वाले निर्मल जैन ने रक्तदान को महादान मानकर इसे सिर्फ दैनिक जीवन का हिस्सा नहीं बल्कि जीवन का सर्वोच्च मिशन बन गया। खुद तो रक्तदान करते ही हैं वे दूसरों को भी रक्तदान को प्रेरित करते हैं ।
निर्मल जैन के अनुसार उनके इस अकल्पनीय सेवा यात्रा का अंकुरण 45 साल पहले एक साधारण सी घटना से हुआ। एक पैथोलॉजी के बाहर खड़े 15-16 लोगों की भीड़ देखकर,
जब उन्होंने उत्सुकतावश पूछा कि क्या बात है, तो जवाब मिला कि एक महिला को तत्काल रक्त की आवश्यकता है। यह भीड़ उसी के लिए खड़ी थी, लेकिन जब उन्होंने उन लोगों से पूछा कि वे स्वयं रक्तदान क्यों नहीं कर रहे, तो जवाब हैरान करने वाला था कि हम कमजोर हो जाएंगे। समाज में फैली इस अज्ञानता और मिथक ने उनके हृदय को झकझोर दिया। उस पल उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के उस अजनबी महिला के लिए अपना पहला रक्तदान किया। वह केवल एक इकाई रक्त नहीं था, वह मानवता के प्रति एक अटूट प्रतिज्ञा थी, जिसने एक युवा मन को 'रक्तवीर' में बदल दिया।
उस दिन के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। न केवल उन्होंने स्वयं को रक्तदान के लिए समर्पित किया, बल्कि उनके मन में लोगों को इस जीवनदायी कार्य के प्रति जागरूक करने की तीव्र ज्वाला जाग उठी। तब से लेकर आज तक उन्होंने 2000 से अधिक रक्तदान शिविरों के आयोजन और सहभागिता में मुख्य भूमिका निभाई है। उनके प्रयासों का ही परिणाम है कि लाखों लोगों को समय पर रक्त उपलब्ध हो सका। उनकी संवेदनशीलता का सबसे बड़ा प्रमाण उनका थैलेसीमिया ग्रस्त बच्चों के प्रति अभिभावक स्वरूप प्रेम है। मात्र 10 बच्चों से शुरू होकर आज वे 300 से अधिक थैलेसीमिया पीड़ितों को रक्त उपलब्ध कराने में एक 'कवच' की भूमिका निभा रहे हैं। न केवल रक्त, बल्कि अनेक बच्चों को इस बीमारी से स्थायी निजात दिलाने हेतु बोन मैरो ट्रांसप्लांट कराने में भी उन्होंने सक्रिय मदद की।
यह अथक सेवा यात्रा अनदेखी नहीं रही। उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए उन्हें झारखंड के राज्यपाल, विभिन्न स्वास्थ्य मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, उपायुक्तों, पुलिस अधीक्षकों और अनेक सरकारी व गैर-सरकारी संस्थाओं द्वारा कई बार सम्मानित किया गया है। सरकारी स्तर पर उनकी पहचान इतनी सुदृढ़ है कि झारखंड एड्स कंट्रोल सोसायटी के 7-सदस्यीय ब्लड बैंक संचालन पैनल में उन्हें चयनित किया गया। आज गूगल पर 'ब्लड मेन' सर्च करने से भारत के प्रमुख ब्लड बैंक की सूची में उनका नाम आता है। यह न केवल निर्मल जैन के कद को दर्शाता है, बल्कि हजारीबाग के लिए एक गर्व का विषय है।
वर्तमान में निर्मल जैन वॉलंटरी ब्लड डोनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। रेड क्रॉस सोसाइटी में ब्लड बैंक प्रभारी और रोटरी क्लब व जैन महिला मिलन के मोतियाबिंद कैंपों में 20 वर्षों का सक्रिय योगदान, उनकी सेवा की विविधता को दर्शाता है। वे केवल एक सामाजिक कार्यकर्ता नहीं हैं वे एक समग्र सेवक हैं। हजारीबाग से पारसनाथ पहाड़ी तक की 127 किलोमीटर की पदयात्रा का 22 वर्षों तक नेतृत्व, जैन युवा परिषद के 11 वर्षों तक अध्यक्ष पद का निर्वहन, और विभिन्न राज्यों की यात्रा संघ का कुशल संचालन उनके संगठनात्मक कौशल और आध्यात्मिक जुड़ाव को प्रमाणित करता है।
उनकी सेवा की धारा अध्यात्म और शिक्षा से भी अविरल बहती है। 11 वर्षों तक जैन पाठशाला में बच्चों को निशुल्क शिक्षा देना, वर्षों तक जैन भजन मंडली का नेतृत्व, और विभिन्न साधु-संतों के चातुर्मास का मुख्य संयोजक बनना उनके धार्मिक और सांस्कृतिक समर्पण को दर्शाता है। सरकारी और गैर-सरकारी संस्थानों में उनकी विशेषज्ञता और 'सर्व धर्म सम्भाव समिति' के फाउंडर मेंबर के रूप में उनका योगदान, उन्हें समाज के हर वर्ग के लिए प्रेरणा का स्रोत बनाता है। रामनवमी जैसे त्योहारों पर वर्षों से ओपीडी में सेवा देना, उनके जन-जन के प्रति प्रेम का प्रतीक है।
आज 100वें रक्तदान के ऐतिहासिक अवसर पर यह समाज उन्हें नमन करता है। 45 साल पहले की वह एक यूनिट, आज लाखों यूनिट्स के सैलाब में बदल चुकी है। वे हजारीबाग के लिए केवल 'ब्लड मैन' नहीं, बल्कि मानवता के 'प्राण वायु' हैं, जिनका हर रक्त कण अब सेवा का एक नया अध्याय लिख रहा है। आइए हम सभी मिलकर निर्मल जैन के दिलेरी और जज्बे को सलाम करें ।
