हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के वर्तमान सांसद और हजारीबाग सदर विधानसभा क्षेत्र के निवर्तमान विधायक मनीष जायसवाल के वर्षों के अथक प्रयास और झारखंड विधानसभा में उनकी निरंतर गूँजती आवाज के बाद साल 2023 में हजारीबाग सदर अस्पताल में एक नई उम्मीद की किरण जगी थी। थैलेसीमिया, सिकल सेल एनीमिया और हीमोफिलिया जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए यहाँ 'डे केयर सेंटर' की स्थापना की गई थी, ताकि उन्हें विशेषज्ञ उपचार और राहत मिल सके। लेकिन विडंबना यह है कि आज यह केंद्र अपनी मूल परिकल्पना से कोसों दूर हो चुका है। हजारीबाग के मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मेल सर्जिकल वार्ड में स्थित इस यूनिट की दीवारों पर रंग-रोगन और पेंटिंग तो मौजूद है, मगर भीतर की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। जिस वार्ड को केवल गंभीर रक्त विकारों से ग्रसित मरीजों के लिए आरक्षित होना चाहिए था, उसे अब एक 'कॉमन वार्ड' बना दिया गया है, जहाँ सामान्य बीमारियों और सर्जरी वाले मरीजों का भी इलाज चल रहा है। इससे उन विशेष श्रेणी के मरीजों को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है जिनके लिए यह केंद्र बना था ।
यहाँ दवाओं की उपलब्धता की स्थिति और भी चिंताजनक है। हजारीबाग और चतरा जिले के लगभग 40 से अधिक हीमोफिलिया रोगी अपनी जीवन रक्षक दवाओं फैक्टर 8 और फैक्टर 9 के लिए पिछले क़रीब 40 दिनों से भटक रहे हैं। अस्पताल में इन दवाओं का स्टॉक समाप्त होने से मरीजों की जान पर बन आई है।
उल्लेखनीय है कि वर्तमान में यहाँ जो फैक्टर दिए जाते हैं, वे न केवल महंगे हैं बल्कि मरीजों को महीने में कम से कम चार बार अस्पताल आने पर मजबूर करते हैं। इसके विपरीत रांची, बोकारो, कोडरमा और देवघर जैसे जिलों में 'मिमिक फैक्टर' उपलब्ध कराया जा रहा है, जो बेहद असरदार होने के साथ-साथ सस्ता भी है और महीने में केवल एक बार ही सुई लेने की आवश्यकता पड़ती है। इससे मरीजों को बार-बार होने वाले शारीरिक दर्द और दूर-दराज से आने-जाने की आर्थिक मार से मुक्ति मिल सकती है, लेकिन हजारीबाग के मरीज अब भी इस दवाई सुविधा से वंचित हो रहें हैं।
मरीजों की इस गंभीर समस्या और व्यवस्था की संवेदनहीनता को देखते हुए सांसद मनीष जायसवाल ने तत्काल इसपर संज्ञान लिया है। उन्होंने अपनी संवेदनशीलता का परिचय देते हुए अविलंब अपने हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के सांसद मीडिया प्रतिनिधि रंजन चौधरी को इस मामले पर त्वरित कार्रवाई और प्रशासनिक समन्वय का निर्देश दिया। सांसद मनीष जायसवाल के निर्देश पर उनके मीडिया प्रतिनिधि रंजन चौधरी ने हजारीबाग के सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार से विस्तृत वार्ता की और डे केयर सेंटर की वास्तविक उपयोगिता बहाल करने के साथ-साथ हीमोफिलिया मरीजों के लिए अविलंब दवा फैक्टर उपलब्ध कराने का आग्रह किया। उन्होंने आश्वस्त किया है कि जिला प्रशासन से इस संबंध में वार्ता हो रही है जल्द ही इसका समाधान भी कर लिया जाएगा। सांसद मीडिया प्रतिनिधि रंजन चौधरी ने हजारीबाग उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह को ट्वीट के माध्यम से इस गंभीर और संवेदनशील मामले से अवगत कराते हुए उनसे भी इन असहाय मरीजों की सहायता हेतु हस्तक्षेप करने की अपील की है और उनके जीवन रक्षा के लिए तत्काल सहयोग का अनुरोध किया है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और जिला स्वास्थ्य विभाग इस जनहित के मुद्दे पर कितनी जल्दी संज्ञान लेती है ताकि डे केयर सेंटर अपने वास्तविक स्वरूप में लौट सके और इसपर आश्रित मरीजों को उनका हक मिल सके ।
