कोरोनावायरस की भयावहता को देखते हुए सुरक्षा हेतु भारत सरकार द्वारा पूरे देश में लगाया गया लॉक डाउन धीरे धीरे चरणबद्ध तरीके से रियायतो के साथ लगभग सामान्य हो चला है। जो थोड़ी बहुत सख्ती नजर दिख रही है वह भी बहुत जल्द सामान्य हो ही जाएगी। इस दरमियान आम जनजीवन को कई खट्टे मीठे कड़वे अनुभवों से रूबरू होना पड़ा जहां एक और कोरोनावायरस की व्यापकता बढ़ती गई वहीं दूसरी ओर खान पान रहन सहन आचार विचार तथा चरित्र चिंतन की दिशा धारा हमेशा के लिए तय हो गई। मर्ज की दवा तो न निकल सकी मगर यह तय हो गया की वातावरण को सेनीटाइज करने के साथ-साथ भक्ष्य अभक्ष्य खाद्य पदार्थों का चयन, जीवनशैली, चिंतन, चरित्र में प्रखरता विवेक शीलता लाकर अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को अनवरत बनाए रखना भी नितांत जरूरी है। धार्मिक आचार विचार जीवन मूल्य परंपरा पर भी सारी दुनिया में मंथन मूल्यांकन हुआ है और नतीजतन यह पाया गया कि अब विवेकशीलता को प्रश्रय देते हुए जो उचित हो उसी को अंगीकार स्वीकार किया जाए।
इस दरमियान जीवन जीने का इंसानी जज्बा दिखा तो पुलिस प्रशासन की विनय शीलता भी दिखी। चिकित्सकों एवं सफाई कर्मियों का सेवा भाव भी दिखा तो धार्मिक सामाजिक एवं राजनीतिक संगठनों की मानवता के प्रति कर्तव्य निष्ठा भी दिखी। हजारीबाग में तो धार्मिक सामाजिक एवं राजनीतिक दलों के बीच की दीवार ढहते दिखी। पूरे भारतवर्ष में गायत्री परिवार की तरह झारखंड के हजारीबाग रांची कोडरमा जमशेदपुर बोकारो आदि स्थानों पर भी गायत्री परिजनों की मानवता के लिए 24 घंटे की सक्रियता भी दिखी।शहर के टोले मोहल्ला दूरदराज के बीहड़ कस्बो जहां सुरक्षा कारणों एवं भयवश भी न पहुंच पाने की विवशता थी उन स्थानों पर भी गायत्री परिजनों की उपस्थिति अचरज में डाल रही थी। 75 वर्ष की उम्र में गायत्री शक्तिपीठ हजारीबाग के प्रथम ट्रस्टी एवं गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के सानिध्य में कुछ पल बिताने का सौभाग्य पाने वाले प्रसिद्ध समाजसेवी डूंगरमल जैन को अपनी उम्र की परवाह न करते हुए, तपती धूप की परवाह न करते हुए झुग्गी झोपड़ियों के बीच सूखे अनाज के पैकेट बच्चों के लिए बिस्कुट तो कभी चूड़ा गुड़ लेकर जरूरतमंदों के बीच पहुंचते हुए अक्सर देखा जाता रहा। रमेश कुमार स्नेही एवं अर्जुन साव जैसे परिजन को पूरी सब्जी लेकर लगातार 50 दिन गांव गांव कस्बे कस्बे घूम-घूम कर जरूरतमंदों को पूरी सब्जी बांटते देखा गया। मुर्दा कल्याण समिति के मोहम्मद खालिद को शहर के विभिन्न वार्डों में भूखे लोगों को रोटी का निवाला परोसते देखा गया। शहर स्थित मटवारी जैसे बड़े भूभाग में आपदा प्रबंधन के विभिन्न सिंह तथा मटवारी की गायत्री परिजन संगीता गोस्वामी को अपने इलाके में कभी सूखा अनाज का पैकेट कभी चूड़ा गुड़ तो कभी पूरी सब्जी अनवरत बांटते देखा गया। विधायक मनीष जयसवाल की दानशीलता तो दिखाई दी इसके अलावा कई धार्मिक सामाजिक संगठनों के साथ कुछ लोग व्यक्तिगत स्तर से भी जरूरतमंदों के बीच कुछ ना कुछ पहुंचाते दिखे यह कुछ नामचीन नाम ऐसे हैं जिन्होंने सचमुच मानवीय जिजीविषा को जिंदा रखा है।
अमन, धनंजय जैसे कुछ युवा विभूतियों के सत प्रयासों की भी चर्चा हो रही है सामने आए जिन्होंने गायत्री परिजनों के अंदरूनी क्रियाकलापों एवं व्यवस्था का महत्वपूर्ण काम भी बखूबी निभाया।

