(1) हर वर्ष 5 जून को “विश्व पर्यावरण दिवस” मनाया जाता है, इस बार 47वां विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जा रहा है। दरअसल वर्ष 1972 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा मानव पर्यावरण विषय पर संयुक्त राष्ट्र महासभा का आयोजन किया गया था। इसी चर्चा के दौरान विश्व पर्यावरण दिवस का सुझाव भी दिया गया और इसके दो साल बाद, 5 जून 1974 से इसे मनाना भी शुरू कर दिया गया। इसमें हर साल लगभग 143 से अधिक देश हिस्सा लेते है, जिसमें कई सरकारी, सामाजिक और व्यावसायिक लोग पर्यावरण की सुरक्षा, समस्या आदि विषय पर बात करते हैं।
(2) इस दिन को मनाने का मुख्य कारण व्यक्ति को पर्यावरण के प्रति सचेत करने का और यह बताने का है कि हम इंसानों और पर्यावरण के बीच बहुत गहरा संबंध है। प्रकृति के बिना हमारा जीवन संभव नहीं है। लेकिन, पूरे विश्वसमुदाय द्वारा इतने कार्य करने के बावजूद पर्यावरणीय स्थिति में वो सुधार नहीं हो पाया था जो पिछले 60 दिनों में वैश्विक लॉकडाउन के चलते हुआ है।
(3) आज 60 दिनों के लांकडाउन में हमारे देश की मृतप्राय नदिया स्वच्छ होकर इतराते हुये बह रही है, और हमारा वायुमण्डल प्रदूषणमुक्त होकर चिड़ियों के चहचहाट से सुखमय हो गया है। इसका तात्पर्य यह हुआ कि ”पर्यावरण को हम बनाते नही बल्कि अपने ग़लत कार्यों से सुखमय पर्यावरण को हम दूषित ही करते है”।
(4) अगर ”हम केवल थोड़ा सा सहयोग दे:- गन्दगी ना फैलाये, नदियों में ज़हरीले तत्व न बहाये, बिना वजह पेड़ न काटे, वातावरण में गाड़ियों का धुआँ कम से कम निकलने दें” तो यह महान पृथ्वी हमारे थोड़ी - बहुत प्रदूषण को स्वयं ही स्वच्छ करके हमारी स्वस्थ और प्रसन्न रखेगी ।
