हजारीबाग। झारखंड में संभावित परिसीमन को लेकर आदिवासी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन की तैयारी तेज हो गई है। इसी कड़ी में बुधवार को हजारीबाग परिसदन में पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने आदिवासी संगठनों के पदाधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और समाज के प्रमुख लोगों के साथ बैठक की।

बैठक की अध्यक्षता विजय सिंह भोक्ता ने की, जबकि संचालन हजारीबाग जिला प्रवक्ता विक्की कुमार धान ने किया। बैठक में आगामी 30 अगस्त को रांची के मोरहाबादी मैदान में प्रस्तावित आदिवासी एकता महाजुटान रैली की तैयारियों और हजारीबाग जिले से अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने को लेकर चर्चा की गई।

बैठक को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने कहा कि झारखंड का गठन आदिवासियों के जल, जंगल, जमीन, परंपरा और संस्कृति की रक्षा के उद्देश्य से हुआ है। उन्होंने कहा कि पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों और झारखंड की विशिष्ट सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखे बिना परिसीमन की प्रक्रिया आगे बढ़ाना आदिवासी समाज के हित में नहीं होगा।

उन्होंने आशंका जताई कि जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन होने की स्थिति में यदि झारखंड में आदिवासी आरक्षित विधानसभा सीटों की संख्या कम होती है, तो इससे आदिवासी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बड़ा नुकसान हो सकता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आदिवासी आरक्षित सीटों में कमी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह केवल सीटों का मामला नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के राजनीतिक अधिकार, अस्तित्व और भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है।

बंधु तिर्की ने आदिवासी समाज के सभी संगठनों और लोगों से इस मुद्दे पर एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि देशभर में आदिवासी समाज जल, जंगल और जमीन के अधिकारों के साथ अपनी संस्कृति, परंपरा और राजनीतिक हिस्सेदारी की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहा है।

वहीं, विक्की कुमार धान ने कहा कि संभावित परिसीमन से झारखंड में आदिवासी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। उन्होंने कहा कि अधिकारों की रक्षा के लिए समाज को एकजुट होना होगा। उन्होंने बताया कि 30 अगस्त को रांची के मोरहाबादी मैदान में होने वाले महाजुटान को ऐतिहासिक बनाने के लिए हजारीबाग जिले से बड़ी संख्या में लोग रांची पहुंचेंगे।

उन्होंने बताया कि महाजुटान को लेकर जिले में जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा है। प्रखंड और पंचायत स्तर पर लोगों को जागरूक कर रांची पहुंचने का आह्वान किया जा रहा है। बैठक में रैली की सफलता के लिए विभिन्न स्तरों पर जिम्मेदारियां तय करने, जनजागरण अभियान चलाने और अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

बैठक में केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष महेंद्र बेक, राष्ट्रीय आदिवासी छात्र संघ के कार्यकारी अध्यक्ष आनंद मरांडी, उपाध्यक्ष रवि मांझी सहित बड़ी संख्या में आदिवासी संगठनों के पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता और समाज के लोग मौजूद रहे।