किसी भी अस्पताल की पहचान केवल उसकी इमारत, अत्याधुनिक मशीनों या चिकित्सा सुविधाओं से नहीं होती, बल्कि उस विश्वास से होती है, जिसे वह अपने मरीजों के दिलों में वर्षों की निस्वार्थ सेवा से अर्जित करता है। यही विश्वास आज आरोग्यम अस्पताल की सबसे बड़ी पूंजी है। दस वर्ष पहले जिस सेवा-संकल्प के साथ इस अस्पताल की स्थापना हुई थी, वह आज हजारीबाग ही नहीं, बल्कि आसपास के कई जिलों के हजारों परिवारों के लिए उम्मीद और भरोसे का दूसरा नाम बन चुका है।
उच्च स्तरीय की पढ़ाई छोड़कर समाज सेवा और जनस्वास्थ्य को अपना जीवन उद्देश्य बनाने वाले अस्पताल के निदेशक हर्ष अजमेरा ने जब आरोग्यम अस्पताल की नींव रखी थी, तब उनका सपना केवल एक अस्पताल बनाना नहीं था, बल्कि ऐसा स्वास्थ्य संस्थान तैयार करना था, जहां हर मरीज को आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के साथ आत्मीयता, संवेदनशीलता और विश्वास का एहसास हो। आज दस वर्षों की इस यात्रा में वह सपना साकार होता दिखाई देता है। समय के साथ आरोग्यम अस्पताल ने चिकित्सा सेवाओं के क्षेत्र में निरंतर नए आयाम स्थापित किए हैं। आज अस्पताल सामान्य चिकित्सा, आपातकालीन सेवाएं, जनरल एवं लेप्रोस्कोपिक सर्जरी, महिला एवं प्रसूति रोग, शिशु रोग, हड्डी एवं जोड़ रोग, मधुमेह एवं उच्च रक्तचाप उपचार, गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू), डिजिटल पैथोलॉजी, डिजिटल एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड तथा अन्य अत्याधुनिक जांच एवं उपचार सुविधाओं से सुसज्जित है। अनुभवी चिकित्सकों, प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ और समर्पित स्वास्थ्यकर्मियों की टीम ने हजारों मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार देकर उनके जीवन में नई उम्मीद जगाई है। आरोग्यम अस्पताल की दस वर्षों की यात्रा का सबसे चुनौतीपूर्ण दौर वैश्विक कोरोना महामारी रही। जब पूरा देश अभूतपूर्व स्वास्थ्य संकट से जूझ रहा था, तब अस्पताल ने अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए दिन-रात मरीजों की सेवा की। सीमित संसाधनों के बावजूद चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों ने अथक परिश्रम कर अनगिनत लोगों को समय पर उपचार उपलब्ध कराया। महामारी के कठिन दौर में आरोग्यम अस्पताल लोगों के लिए केवल एक अस्पताल नहीं, बल्कि जीवन बचाने वाली उम्मीद बनकर खड़ा रहा। स्वास्थ्य सेवा के साथ-साथ अस्पताल ने समाज के प्रति अपने दायित्व का भी निरंतर निर्वहन किया है। समय-समय पर निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर, विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श, स्वास्थ्य जागरूकता अभियान और जरूरतमंद मरीजों के लिए विशेष चिकित्सा सेवाओं का आयोजन कर हजारों लोगों को लाभान्वित किया गया। यही कारण है कि आरोग्यम अस्पताल ने केवल मरीजों का उपचार ही नहीं किया, बल्कि समाज का अटूट विश्वास भी अर्जित किया। उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाओं, आधुनिक प्रबंधन और मरीज-केंद्रित कार्यशैली के कारण आरोग्यम अस्पताल को विभिन्न संस्थाओं द्वारा अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से भी नवाजा गया है। यह सम्मान केवल संस्थान की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरी टीम की सेवा भावना और जनता के विश्वास का परिणाम है। दस वर्षों की इस गौरवपूर्ण यात्रा के दौरान अस्पताल ने अपनी सेवाओं का विस्तार करते हुए दूसरी शाखा की भी स्थापना की है। यह विस्तार इस बात का प्रमाण है कि आरोग्यम अस्पताल भविष्य में और अधिक लोगों तक गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के अपने संकल्प पर निरंतर आगे बढ़ रहा है। अस्पताल के निदेशक हर्ष अजमेरा ने कहा कि दस वर्षों की यह यात्रा हमारे लिए उपलब्धियों से अधिक विश्वास की यात्रा रही है। मरीजों का विश्वास, उनके चेहरे पर लौटती मुस्कान और स्वस्थ होकर घर लौटने की खुशी ही हमारी सबसे बड़ी प्रेरणा है। हजारीबाग की जनता ने जिस स्नेह और भरोसे के साथ हमें अपनाया है, उसके लिए हम सदैव आभारी रहेंगे। आने वाले समय में और बेहतर चिकित्सा सुविधाएं, आधुनिक तकनीक तथा विशेषज्ञ सेवाओं के माध्यम से जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करना हमारा लक्ष्य है। अस्पताल की प्रशासक जया सिंह ने कहा कि आरोग्यम अस्पताल की सफलता केवल चिकित्सा सुविधाओं की वजह से नहीं, बल्कि पूरी टीम की संवेदनशील सोच, अनुशासित कार्यप्रणाली और मरीजों के प्रति आत्मीय व्यवहार का परिणाम है। यहां आने वाला प्रत्येक मरीज हमारे लिए परिवार का सदस्य है। पिछले दस वर्षों में जनता ने जिस विश्वास और स्नेह से हमें आगे बढ़ाया है, वही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। हम भविष्य में भी सेवा, समर्पण और गुणवत्ता के इसी संकल्प के साथ लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए निरंतर कार्य करते रहेंगे। अपनी दसवीं वर्षगांठ के इस ऐतिहासिक अवसर पर आरोग्यम अस्पताल परिवार हजारीबाग एवं आसपास के सभी नागरिकों, मरीजों, चिकित्सकों, कर्मचारियों और शुभचिंतकों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करती हूं यह दस वर्षों का सफर केवल समय का पड़ाव नहीं, बल्कि सेवा, विश्वास और मानवीय संवेदनाओं से लिखी गई एक ऐसी यात्रा है, जो आने वाले वर्षों में भी जनस्वास्थ्य की नई इबारत लिखती रहेगी। आपका विश्वास ही हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है, और आपकी सेवा ही हमारा सबसे बड़ा धर्म।
